सांसद महेश गिरी ने संसद सदन में तीन प्राइवेट मेंबर विधेयक प्रस्तुत किये।


नई दिल्ली। भाजपा राष्ट्रीय मंत्री व पूर्वी दिल्ली से सांसद महेश गिरी ने संसद समक्ष खाद्य सुरक्षा हेतु भारतीय दंड संहिता विधेयक 2017 में संसोधन हेतु प्रस्ताव रखा। सांसद ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से फूड सेफ्टी एंड स्टेडर्ड आथोरिटी आफ इंडिया को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वह वैज्ञानिक तरीके से खाद्य पदार्थों का उत्पादन, भंडारण, वितरण, विक्रय तथा आयात का नियमन करें जिससे देशवासियों को सुरक्षित तथा गुणवत्ता पूर्ण पदार्थ उपलब्ध हो सकें। इस विधेयक में से दूषित खाद्य पदार्थों के उत्पान में लगे व्यक्तियोंध्संस्थानों के लिए सजा का प्रावधान है। लेकिन इस प्रावधान के बावजूद हमारे देश में दूषित खाद्य पदार्थों की समस्या कायम है। इस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले लोग कई बार बीमारी के शिकार हो जाते है। उदाहरण के तौर पर (FSSAI) के एक अध्यन के मुताबिक देश में कुल बिक्री का 68.4 प्रतिशत दूघ मिलावट पूर्ण रहता है। देश में ऐसे कई उदाहरण सामने आए है जब मिलावट पूर्ण खाद्य का सेवन करने से लोग बीमार हुए है। उच्चतम न्यायालय ने भी 2014 में सरकार ने दूध मिलावट के खिलाफ कड़े नियम को और अधिक कड़ा बनाने को कहा था।

सांसद ने कहा कि इंडियन पेनल कोड के सेक्शन 272 और 273 में मिलावट पूर्ण खाद्य तथा पेय पदार्थों के संबंध में सजा का प्रावधान है। लेकिन ये प्रावधान दोषियों को उचित सजा देने के लिए काफी नही है। वर्तमान में दोषियों के लिए 1000 रूपये का जुर्माना या 6 माह तक की कैद को प्रावधान है। लेकिन अब यह बिल आईपीसी 1860 में संशोधन कर सजा के प्रावधान को 10 लाख तथा अजिवन कारावास अथवा दोनों तक बढ़ाता है। यह संसोधन खाद्य पदार्थो में मिलावट करने वाले व्यक्तियों अथवा संस्थानों को मिलावट करने से रोकने के लिए आवश्यक है।

साथ ही सांसद ने प्रभावित तीर्थयात्रियों के लिए एक समान बीमा विधेयक 2017 पेश किया व बताया कि भारत तीर्थों का देश है तथा यहां देश के कोने-कोने में लोग तीर्थ यात्रा के लिए निकलते है। इनसे कुछ जगहों पर अत्याधिक भीड़ इकट्टी हो जाती है। खास तौर पर त्योहार के महीनों में इन तीर्थ स्थानो में से कुछ अत्यंत दुर्गम स्थान में अव्यवस्थित है। उदाहरण स्वरूप अमरनाथ। जहां तीर्थटन करना जोखिम भरा होता है। कुछ समय से ऐसी दुर्घटनाएं सामने आई है जिसमें तीर्थाटन के दौरान यात्रियों को जान गवानी पड़ी है। वर्तमान में श्राईन बोर्ड तथा राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा तीर्थयात्रियों को बीमा सहायता उपलब्ध कराई जाती है परन्तु इसमें एकरूपता नही है। सांसद ने उदाहरण के तौर पर बताया कि वर्तमान में अमरनाथ यात्रा में दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिवार को 1 लाख रूपया दिया जाता है। यह राशि एक जान की कीमत की तुलना में काफी कम है। लेकिन भारत की हज कमेटी जो अत्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन एक वैघानिक संस्था है ने हाल ही मे हज यात्रा के दौरान जान गंवाने वाले यात्रियों की बीमा राशि को 10 लाख रूपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि मजहब के आधार पर बीमा राशि में अंतर ठीक नही है। मनुष्य की जान हर हालत में कीमती है। बीमा राशि का यह अंतर संविधान की धारा 15 के विपरीत है जो सुनिश्चित करता है। कि व्यक्तियो के बीच धर्म, जाति, लिंग तथा स्थान के आधार पर भेद नहीं किया जाएगा।

सांसद ने कहा कि यह बिल एक केन्द्रीय बीमा समिति का गठन को प्रस्तावित करता है। जो एक समान बीमा नीति को निर्धारित करेगा तथा जिसका निर्णय हर एक श्राईन बोर्ड तथा तीर्थ स्थलों को मान्य होगा। इसका उद्देश्य है कि तीर्थ यात्रा के दौरान जो लोग जान गंवा बैठते है। उन्हें 10 लाख रूपये तथा दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल लोगों को तीन लाख रूपये की बीमा सहायता मिले। उन्होंने कहा कि इस बिल के माध्यम से यह भी सुनिश्चित हो सकेगा कि जो संस्थाए जिनमें गैर सरकारी संगठन भी शामिल है, तीर्थ यात्रियों को निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराए।

इसके साथ ही सांसद महेश गिरी ने महिलाओं का अनावश्यक सीजेरियन सेक्शन प्रसव से सरंक्षण विधेयक 2017 का प्रस्ताव भी संसद के समक्ष रखा। सांसद ने कहा कि वर्तमान में कुछ निजी अस्पतालों द्वारा अपने फायदे हेतु महिलाओं का सीजेरियन प्रसव किया जाता है जबकि इसकी जरूरत भी नही होती। इस विधेयक से ऐसे अस्पतालों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

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